सोशल मीडिया पर अचानक उभरी “कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)” अब केवल एक वायरल ट्रेंड नहीं रही, बल्कि राजनीतिक गलियारों में बेचैनी पैदा करने वाला डिजिटल आंदोलन बन चुकी है। इसके संस्थापक अभिजीत डिपके एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं, क्योंकि छत्रपति संभाजीनगर स्थित उनके घर के बाहर पुलिस तैनात किए जाने, अकाउंट हैकिंग के आरोपों, ऑनलाइन धमकियों और “एंटी-इंडिया गैंग” जैसे गंभीर आरोपों ने पूरे मामले को और विस्फोटक बना दिया है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांत मजूमदार के साथ सोशल मीडिया पर हुई तीखी भिड़ंत ने इस विवाद को सीधे राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ दिया है। इंस्टाग्राम एनालिटिक्स और फॉलोअर्स की असली-नकली बहस अब केवल तकनीकी सवाल नहीं रही, बल्कि यह राजनीतिक प्रभाव, नैरेटिव कंट्रोल और डिजिटल ताकत की लड़ाई में बदल चुकी है।
CJP की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि आज का असंतोष सड़कों से ज्यादा मोबाइल स्क्रीन पर आकार ले रहा है। व्यंग्य, मीम और डिजिटल प्रतिरोध के जरिए शुरू हुआ यह अभियान अब सत्ता, राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों से टकरा रहा है। समर्थक इसे व्यवस्था के खिलाफ युवाओं की रचनात्मक बगावत बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे अराजक और संदिग्ध एजेंडों से प्रेरित अभियान कह रहे हैं।
सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक इंटरनेट सनसनी है जो कुछ दिनों में खत्म हो जाएगी, या फिर यह उस नए भारत की झलक है जहाँ राजनीतिक आंदोलन चुनावी मंचों से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म और वायरल वीडियो से तय होंगे?
- के. पी. मलिक

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